Merchant Navy Kaise Join Karein? Courses, Eligibility & Salary

Merchant Navy Kaise Join Karein? Courses, Eligibility & Salary

समंदर सिर्फ़ घूमने की जगह नहीं है, बल्कि इसे दुनिया के कारोबार की रीढ़ भी माना जाता है। समुद्री रास्तों के ज़रिये ही दुनिया के ज़्यादातर देशों के बीच व्यापार होता है।

भारत में ही 12 बड़े और 200 से ज़्यादा छोटे बंदरगाह हैं, जहां से हर रोज़ लाखों–करोड़ों रुपये का सामान आयात-निर्यात होता है। इसी सेक्टर से जुड़ा एक ऐसा करियर है, जो बड़ी संख्या में युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करता है — मर्चेंट नेवी

दुनिया भर में काम करने वाले कुल मर्चेंट मरीनर्स में से करीब 7 फ़ीसदी भारतीय हैं। आने वाले समय में शिपिंग इंडस्ट्री के और तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है। भारत सरकार ने साल 2047 तक मैरीटाइम सेक्टर में 1.5 करोड़ से ज़्यादा रोज़गार पैदा करने का लक्ष्य रखा है।

अब बात करते हैं मर्चेंट नेवी करियर की। ऊंची सैलरी, दुनिया के अलग-अलग देशों में घूमने का मौका और कम उम्र में बड़ी ज़िम्मेदारी — ये सब इसे आकर्षक बनाते हैं। हालांकि, इस करियर में चुनौतियां भी कम नहीं हैं।

करियर कनेक्ट की इस कड़ी में हम समझेंगे:

  • मर्चेंट नेवी क्या है
  • इसमें जाने का रास्ता क्या है
  • यह किन लोगों के लिए सही विकल्प है
  • और इसमें कौन-सी चुनौतियां सामने आती हैं

मर्चेंट नेवी क्या होती है?

कई युवाओं के मन में यह दुविधा रहती है कि उन्हें इंडियन नेवी जॉइन करनी चाहिए या मर्चेंट नेवी। दोनों का रास्ता समंदर तक जाता है, लेकिन दोनों का उद्देश्य बिल्कुल अलग होता है

एकेडमी ऑफ़ मैरीटाइम एजुकेशन एंड ट्रेनिंग के प्लेसमेंट डायरेक्टर कैप्टन चंद्रशेखर बताते हैं,

“मर्चेंट नेवी वह शिपिंग सर्विस है, जो समुद्र के रास्ते माल ढोने वाले कमर्शियल जहाज़ों से जुड़ी होती है। यह एक कॉस्ट सेंटर है, जहां मुनाफ़ा भी हो सकता है और नुकसान भी।
जबकि नेवी देश की रक्षा के लिए होती है और यह थल सेना व वायु सेना की तरह भारतीय सेना की एक शाखा है।”

मर्चेंट नेवी डिकोडेड नाम की एडुटेक कंपनी चलाने वाले प्रणीत मेहता, जो खुद जहाज़ पर चीफ़ इंजीनियर रह चुके हैं, कहते हैं,

“नेवी में जाने का रास्ता अलग है — NDA परीक्षा और तीन साल की कड़ी ट्रेनिंग। मर्चेंट नेवी प्राइवेट सेक्टर है, जबकि नेवी पूरी तरह सरकारी और देश सेवा के लिए होती है। दोनों की सैलरी में भी बड़ा अंतर होता है।”

मर्चेंट नेवी की निगरानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग (DG Shipping) करता है और इसमें कई विभाग होते हैं।


मर्चेंट नेवी के विभाग और एंट्री के रास्ते

1. नेविगेशन / डेक डिपार्टमेंट

इस विभाग में जाने के लिए:

  • डिप्लोमा इन नॉटिकल साइंस (DNS)
  • या बीएससी इन नॉटिकल साइंस

इनका काम जहाज़ को सुरक्षित रास्ते से चलाना और समुद्र की परिस्थितियों को समझना होता है।

पद:
डेक कैडेट → थर्ड ऑफ़िसर → सेकेंड ऑफ़िसर → कैप्टन


2. इंजन डिपार्टमेंट (मरीन इंजीनियरिंग)

इस विभाग के इंजीनियर जहाज़ के:

  • इंजन
  • मशीनरी
  • तकनीकी सिस्टम

की ज़िम्मेदारी संभालते हैं।

योग्यता:

  • बीटेक इन मरीन इंजीनियरिंग (IMU-CET के ज़रिये)
  • या ग्रैजुएट मरीन इंजीनियरिंग (GME) कोर्स

पद:
जूनियर इंजीनियर → फोर्थ → थर्ड → सेकेंड → चीफ़ इंजीनियर


3. इलेक्ट्रो-टेक्निकल ऑफिसर (ETO)

ETO जहाज़ के:

  • सेंसर
  • अलार्म सिस्टम
  • इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

की निगरानी करता है।

इसके लिए:

  • इलेक्ट्रिकल / इलेक्ट्रॉनिक्स / इंस्ट्रूमेंटेशन में BE या BTech
  • DG Shipping से अप्रूव्ड ETO कोर्स

4. जीपी रेटिंग (सपोर्ट क्रू)

इसमें ऑफिसर पोस्ट नहीं होती, लेकिन जहाज़ के संचालन में इनकी भूमिका अहम होती है।

योग्यता:

  • न्यूनतम 10वीं पास
  • उम्र 17.5 से 25 साल
  • 6 महीने का GP Rating कोर्स

मर्चेंट नेवी किन लोगों के लिए सही है?

प्रतीक तिवारी, जो आज सीनियर चार्टरिंग मैनेजर हैं, बताते हैं कि यह सफ़र आसान नहीं था।

उनका कहना है,

“घरवाले चाहते थे कि मैं आईटी में जाऊं, लेकिन मुझे कुछ अलग करना था। मर्चेंट नेवी के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी, फिर भी मैंने मरीन इंजीनियरिंग चुनी और वहीं से करियर की शुरुआत हुई।”

उनके अनुसार मर्चेंट नेवी उन लोगों के लिए सही है, जो:

  • तकनीक, मशीनरी और नेविगेशन में रुचि रखते हों
  • लंबे समय तक घर से दूर रह सकें
  • अनुशासन और ज़िम्मेदारी के साथ काम कर सकें
  • शारीरिक और मानसिक रूप से फ़िट हों
  • घूमने और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के इच्छुक हों

चुनौतियां क्या हैं?

प्रणीत मेहता बताते हैं कि:

  • कई बार 6 महीने तक समुद्र में रहना पड़ता है
  • परिवार से दूर रहने की वजह से अकेलापन महसूस होता है
  • मानसिक दबाव काफ़ी ज़्यादा होता है
  • सख़्त अनुशासन में काम करना पड़ता है

हालांकि वे यह भी कहते हैं,

“आज के समय में ज़्यादातर क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बहुत ज़्यादा है, लेकिन वैश्विक व्यापार बढ़ने के साथ आने वाले 10 सालों में मर्चेंट नेवी में बड़ा उछाल आ सकता है। अभी सही समय है — प्रतियोगिता कम है और सैलरी अच्छी।”


मर्चेंट नेवी के प्रमुख कोर्स

  • डिप्लोमा इन नॉटिकल साइंस (1 साल)
  • बीएससी नॉटिकल साइंस (3 साल)
  • बीटेक मरीन इंजीनियरिंग (4 साल)
  • ग्रैजुएट मरीन इंजीनियरिंग – GME (8–12 महीने)
  • इलेक्ट्रो टेक्निकल ऑफिसर – ETO (4 महीने)
  • जीपी रेटिंग (6 महीने)

कौन जा सकता है मर्चेंट नेवी में?

  • 12वीं में फ़िज़िक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स
  • PCM में कम से कम 60%, इंग्लिश में 50%
  • आंखों की रोशनी 6/6

आर्ट्स या कॉमर्स स्टूडेंट्स को:

  • PCM के साथ 11वीं-12वीं दोबारा करनी होगी
  • या NIOS से पढ़ाई करनी होगी

उम्र सीमा: 17 से 25 साल


IMU और प्रवेश परीक्षा

भारत में मर्चेंट नेवी की पढ़ाई के लिए मुख्य संस्थान है इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी (IMU)
हर साल मई के आसपास IMU-CET प्रवेश परीक्षा होती है।


ग्रोथ और सैलरी

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • कम उम्र में लाखों की कमाई
  • प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत कम

शुरुआती सैलरी:

  • कैडेट: लगभग ₹30,000 प्रति माह
  • ऑफ़िसर: ₹45,000 से ₹90,000 प्रति माह

अनुभव के साथ:

  • कैप्टन और चीफ़ इंजीनियर की सैलरी ₹8–15 लाख प्रति माह तक हो सकती है


पढ़ाई कहां से करें?

मरीन कोर्स सिर्फ़:

  • IMU से जुड़े संस्थानों
  • या DG Shipping से मान्यता प्राप्त कॉलेजों

से ही करने चाहिए।

प्रमुख संस्थान:

  • इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी (कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, विशाखापट्टनम, कोच्चि)
  • AMET, चेन्नई
  • टोलानी मैरीटाइम इंस्टीट्यूट, पुणे

GP Rating के लिए:

  • एंग्लो ईस्टर्न मैरीटाइम एकेडमी, कोच्चि
  • इंटरनेशनल मैरीटाइम इंस्टीट्यूट, नोएडा

फ़ीस:
IMU में सालाना फ़ीस लगभग ₹2.25 से ₹2.5 लाख होती है। प्राइवेट संस्थानों में यह अलग-अलग हो सकती है।

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