AI Video Post Kiya to Mushkil Mein? Sarkar ke Naye Rules
सरकार ने AI वीडियो और कंटेंट पर सख्ती करने का ऐलान कर दिया है। अब सोशल मीडिया कंपनियों को AI से बने वीडियो, फोटो और ऑडियो पर साफ़ तौर पर लेबल लगाना अनिवार्य होगा। हाल के दिनों में AI वीडियोज की वजह से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन रही है, इसी को रोकने के लिए सरकार ने नए नियम लागू किए हैं। आइए समझते हैं कि इन नियमों के बाद क्या-क्या बदलाव होने वाले हैं।
आज सोशल मीडिया पर दिखने वाले वीडियो और फोटो पर आंख बंद करके भरोसा करना मुश्किल हो गया है। कभी किसी नेता का फर्जी बयान वायरल हो जाता है, तो कभी किसी आम व्यक्ति का डीपफेक वीडियो तेजी से फैल जाता है।
AI टूल्स ने कंटेंट बनाना आसान जरूर कर दिया है, लेकिन इसके साथ झूठ और धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ गया है। कई बार यूजर्स को यह तक पता नहीं चलता कि जो वे देख रहे हैं, वह असली है या AI से जनरेट किया गया है।
इसी समस्या को काबू में करने के लिए सरकार ने AI से बने कंटेंट पर नए नियम लागू किए हैं। अब इसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और यूजर्स दोनों की जिम्मेदारी तय की गई है। यह बताना जरूरी होगा कि कौन सा कंटेंट AI से बना है और फर्जी व भ्रामक कंटेंट पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी। सरल शब्दों में कहें तो इंटरनेट पर फैल रहे नकली वीडियो और फोटो पर अब सरकार ने ब्रेक लगाने की कोशिश की है।
आइए 5 बिंदुओं में समझते हैं कि भारत में AI-जनरेटेड कंटेंट को लेकर अब क्या प्रावधान किए गए हैं—
AI विजुअल के 10% हिस्से में लेबलिंग जरूरी
नियमों के अनुसार, किसी भी AI-जनरेटेड विजुअल, ऑडियो या वीडियो के कम से कम 10% हिस्से में लेबल दिखाना अनिवार्य होगा, ताकि लोगों को साफ तौर पर पता चल सके कि यह कंटेंट AI से बना है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को हर यूजर से यह पूछना होगा कि अपलोड किया जा रहा कंटेंट सिंथेटिक है या नहीं। इसके लिए प्लेटफॉर्म को वेरिफिकेशन टूल्स का इस्तेमाल करना होगा। नियम तोड़ने पर हर तीन महीने में यूजर्स को पेनल्टी से जुड़ा रिमाइंडर भी दिया जाएगा।
1️⃣ AI कंटेंट पर टैग लगाना अनिवार्य
अगर कोई वीडियो, फोटो या ऑडियो AI से बनाया गया है, तो उसे बिना पहचान के पोस्ट नहीं किया जा सकेगा। सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट पर स्पष्ट लेबल या टैग दिखाना होगा, जिससे यूजर समझ सके कि यह असली नहीं है।
2️⃣ फर्जी AI कंटेंट 3 घंटे में हटाना होगा
अगर किसी प्लेटफॉर्म को पता चलता है कि डीपफेक या भ्रामक AI कंटेंट फैल रहा है, तो उसे तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। पहले इसके लिए 36 घंटे का समय मिलता था, लेकिन अब देरी होने पर सीधी जिम्मेदारी कंपनी की होगी।
3️⃣ यूजर को बताना होगा कि कंटेंट AI से बना है या नहीं
अब पोस्ट करते समय यूजर को यह साफ तौर पर बताना होगा कि कंटेंट AI से जनरेट किया गया है या नहीं। प्लेटफॉर्म केवल यूजर की बात पर भरोसा नहीं करेगा, बल्कि तकनीक के जरिए इसकी जांच भी करेगा।
4️⃣ बच्चों और निजी तस्वीरों से जुड़े AI कंटेंट पर सख्ती
बच्चों से जुड़ा गलत कंटेंट, बिना सहमति के बनाई गई फोटो या वीडियो, फर्जी दस्तावेज और हिंसा दिखाने वाला AI कंटेंट नियमों के तहत तुरंत हटाया जाएगा। ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म को किसी शिकायत का इंतजार नहीं करना होगा।
5️⃣ नियम तोड़ने पर प्लेटफॉर्म पर भी कार्रवाई
अगर सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उनकी कानूनी सुरक्षा समाप्त हो सकती है। इसका मतलब यह है कि अब सिर्फ यूजर ही नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म भी पूरी तरह जिम्मेदार होंगे।


