Global South Public Finance Meet 2025: Bharat ke GST, PFMS aur DBT Model se Vikasशील Deshon ko Kaise Milega Fayda?
भारत ने होस्ट किया Global South का पहला PFM महाकुंभ, दुनिया भर से 50+ देश शामिल
भारत ने दिल्ली में पहली बार ‘Global South Public Finance Management’ पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप समूह के 50+ विकासशील देशों के फाइनेंस मिनिस्टर्स, सेंट्रल बैंकर और टेक्नोक्रेट्स ने हिस्सा लिया। इस मीट का मुख्य उद्देश्य: पारदर्शी, डिजिटल और एफिशिएंट पब्लिक फाइनेंस सिस्टम को ग्लोबल साउथ में फैलाना।
फाइनेंस मिनिस्ट्री और NITI आयोग के नेतृत्व में आयोजित इस समिट में भारत ने अपने GST, PFMS (Public Financial Management System), DBT (Direct Benefit Transfer) और डिजिटल ट्रेजरी जैसे मॉडल्स को रोल मॉडल के तौर पर पेश किया। मीट के एजेंडे में PFM फोरम का गठन भी शामिल था, जो भविष्य में सालाना मीटिंग्स और बेस्ट प्रैक्टिस शेयरिंग का प्लेटफॉर्म बनेगा।
यह भारत की ग्लोबल लीडरशिप का प्रतीक है, क्योंकि विकसित देशों (G7) के विपरीत Global South (G20+ का 80%) में फाइनेंस मैनेजमेंट की चुनौतियां समान हैं। आइए समझते हैं इस मीट के हर पहलू को।
Global South क्या है और PFM क्यों महत्वपूर्ण?
Global South की परिभाषा और चुनौतियां
- Global South: विकासशील और कम विकसित देश (GDP per capita <$10,000), जिनकी आबादी 6 बिलियन+ है। भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका प्रमुख।
- PFM चुनौतियां: फिस्कल डेफिसिट 5-10%, लीकेज 20-30%, मैनुअल ऑडिट, भ्रष्टाचार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी।
PFM का मतलब आसान भाषा में
Public Financial Management = सरकारी पैसे का प्लानिंग, खर्च, ऑडिट और रिपोर्टिंग। अच्छा PFM = कम लीकेज, तेज़ डिलीवरी, ट्रांसपेरेंसी।
वैश्विक आंकड़े:
| क्षेत्र | औसत फिस्कल डेफिसिट | लीकेज रेट | PFM स्कोर (100 में) |
|---|---|---|---|
| G7 | 3.2% | 2-5% | 85+ |
| Global South | 6.8% | 20-35% | 45-60 |
भारत के सक्सेस स्टोरी: GST, PFMS और DBT जो दुनिया देख रही है
GST: दुनिया का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म
- 2017 से अब तक: 1.4 करोड़ GST रजिस्ट्रेशन, ₹2 लाख करोड़+ मासिक कलेक्शन।
- Global South के लिए सीख: एक देश-एक टैक्स, रीयल-टाइम रिपोर्टिंग, AI ईवेजन डिटेक्शन।
- अन्य देशों में रीप्लिकेशन: ब्राजील, नाइजीरिया GST मॉडल अडॉप्ट कर रहे।
GST से पहले vs बाद:
| पैरामीटर | 2017 | 2025 |
|---|---|---|
| टैक्स स्लैब्स | 17 | 4 |
| कलेक्शन समय | 90 दिन | रीयल-टाइम |
| कंप्लायंस कॉस्ट | ₹1.5 लाख/करोड़ | ₹20,000 |
PFMS: 10 करोड़+ ट्रांजेक्शन/दिन, जीरो लीकेज
- Public Financial Management System: केंद्र-राज्य-लोकल बॉडी के फंड ट्रैकिंग।
- डेटा: 2025 में ₹50 लाख करोड़+ DBT, 99.9% ट्रेसिबिलिटी।
- फीचर्स: रीयल-टाइम डैशबोर्ड, GPS ट्रैकिंग (MGNREGA), AI फ्रॉड अलर्ट।
DBT: दुनिया का सबसे बड़ा कैश ट्रांसफर
- ₹34 लाख करोड़+ ट्रांसफर, 1 बिलियन+ बेनिफिशियरी।
- लीकेज रिडक्शन: 2013 में 40% से घटकर 0.1%।
- Global South मॉडल: युगांडा, केन्या DBT कॉपी कर रहे।
मीट के प्रमुख आउटकम: PFM फोरम और 5-ईयर एक्शन प्लान
PFM फोरम का गठन
- हैडक्वार्टर: नई दिल्ली (प्रपोज्ड)।
- मेम्बर: 60+ Global South देश, सालाना समिट।
- फोकस एरिया: ट्रेजरी मॉडर्नाइजेशन, डिजिटल बजटिंग, AI ऑडिट।
5-वर्षीय एक्शन प्लान
- ट्रेजरी डिजिटाइजेशन: 80% देशों में IFMS (Integrated Financial Management System)।
- बजट ट्रांसपेरेंसी: ओपन डेटा पोर्टल, सिटिजन ट्रैकिंग ऐप।
- ऑडिट रिफॉर्म: AI-पावर्ड फोरेंसिक ऑडिट।
- कैपेसिटी बिल्डिंग: भारत के 500+ PFM एक्सपर्ट्स ट्रेनिंग देंगे।
- फंडिंग: World Bank, ADB से $5 बिलियन PFM फंड।
समयबद्ध लक्ष्य टेबल:
| वर्ष | लक्ष्य | कवरेज |
|---|---|---|
| 2026 | 20 देशों में PFMS | Pilot |
| 2028 | 50% Global South डिजिटल ट्रेजरी | Scale-up |
| 2030 | 90% ट्रांसपेरेंसी स्कोर | Full |
आम भारतीय नागरिक को क्या फायदा? लोकल से ग्लोबल इम्पैक्ट
सब्सिडी और वेलफेयर में तेज़ डिलीवरी
- PM-KISAN, उज्ज्वला, आयुष्मान: PFMS से 24 घंटे में बैंक अकाउंट।
- MGNREGA: GPS ट्रैकिंग से वर्कर पेमेंट डिले खत्म।
टैक्सपेयर्स के पैसे की बेहतर मॉनिटरिंग
- रोज़गार सृजन: PFM सुधार से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तेज़।
- फिस्कल डिसिप्लिन: डेफिसिट 6% से घटाकर 3% लक्ष्य।
छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में बदलाव
- लोकल बॉडी फंडिंग: PFMS से पंचायत/नगर निगम को डायरेक्ट ट्रांसफर।
- ट्रांसपेरेंसी ऐप: नागरिक खर्च चेक कर सकेंगे।
नागरिक लाभ टेबल:
| लाभ | पहले | अब/भविष्य |
|---|---|---|
| सब्सिडी समय | 30-90 दिन | 24 घंटे |
| प्रोजेक्ट मॉनिटर | मैनुअल | GPS ऐप |
| फंड लीकेज | 15-20% | <1% |
चुनौतियां: इंटरनेट, स्किल्स और राजनीतिक विल
डिजिटल डिवाइड
- Global South में 40% आबादी बिना इंटरनेट। भारत का Jio मॉडल शेयर होगा।
कैपेसिटी बिल्डिंग
- 10 लाख+ PFM प्रोफेशनल्स की ट्रेनिंग जरूरी। भारत iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म ऑफर करेगा।
राजनीतिक प्रतिबद्धता
- चुनावी पॉपुलिज्म से बजट डिसिप्लिन टूटता है। भारत FRBM एक्ट मॉडल शेयर करेगा।
भारत की ग्लोबल लीडरशिप: G20 से PFM फोरम तक
आर्थिक डिप्लोमेसी का नया चैप्टर
- G20 Presidency 2023: भारत ने PFM को एजेंडा में डाला।
- Voice of Global South Summit: PFM पहला तकनीकी ट्रैक।
- फंडिंग लीडरशिप: भारत $1 बिलियन PFM ग्रांट देगा।
लॉन्ग-टर्म लाभ
- सॉफ्ट पावर: भारत = डेवलपमेंट पार्टनर।
- ट्रेड बूस्ट: बेहतर PFM से इंट्रा-Global South ट्रेड 50%+।
- क्लाइमेट फाइनेंस: ग्रीन बजटिंग मॉडल शेयर।
प्रैक्टिकल टिप्स: PFM सुधारों का फायदा कैसे लें?
- PFMS ट्रैकर ऐप: सब्सिडी/वेलफेयर स्टेटस चेक।
- GST पोर्टल: इनपुट टैक्स क्रेडिट ट्रैक।
- लोकल बॉडी डैशबोर्ड: पंचायत खर्च मॉनिटर।
- फीडबैक: MyGov पर PFM सुझाव दें।
चेकलिस्ट:
| एक्शन | ऐप/पोर्टल | फायदा |
|---|---|---|
| सब्सिडी ट्रैक | PFMS App | 24hr update |
| टैक्स रिफंड | GST Portal | Real-time |
| लोकल प्रोजेक्ट | LocalBody.gov.in | Transparency |
निष्कर्ष: भारत ने खोला Global South का नया युग, PFM से बदलेगी किस्मत
Global South PFM मीट ने भारत को फाइनेंशियल लीडर के तौर पर स्थापित किया। GST, PFMS, DBT जैसे मॉडल न सिर्फ घरेलू सुधार हैं, बल्कि ग्लोबल सॉल्यूशंस भी। अगले 5 सालों में 100+ देश इनका अनुसरण करेंगे। नागरिकों को ट्रांसपेरेंसी और तेज़ सर्विस का फायदा मिलेगा।
