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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार, भारत में हर 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे काफ़ी अलग नज़र आती है।
आंकड़े बताते हैं कि देशभर में शिक्षकों के लाखों पद खाली पड़े हैं। हर साल या दो साल में बड़ी संख्या में शिक्षक भर्तियां भी निकलती रहती हैं।
इसका साफ़ मतलब यह है कि देश में शिक्षकों की ज़रूरत भी है और आपके लिए यह एक बेहतरीन करियर अवसर भी हो सकता है। बस ज़रूरी है सही रास्ता और आवश्यक योग्यताओं की जानकारी होना।
आमतौर पर यह माना जाता है कि भारत में शिक्षक बनने के लिए बीएड (बैचलर ऑफ़ एजुकेशन) की डिग्री ज़रूरी होती है, लेकिन बीएड के अलावा भी कई ऐसे कोर्स हैं जो आपको टीचिंग जॉब तक पहुँचा सकते हैं।
करियर कनेक्ट की इस कड़ी में हम समझेंगे:
- भारत में शिक्षक कैसे बनें?
- कौन-कौन से कोर्स ज़रूरी होते हैं?
- और टीचिंग करियर का पूरा रोडमैप क्या है?
टीचिंग को करियर क्यों चुनें?
दिल्ली नगर निगम के एक स्कूल में प्राइमरी टीचर Rohit पिछले 15 वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वे स्कूल के अलावा ज़रूरतमंद छात्रों को टीचिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए मार्गदर्शन भी देते हैं।
“अगर आप बदलाव लाना चाहते हैं, तो जड़ों से शुरुआत करनी होगी। जड़ों के साथ काम करने में समय लगता है, लेकिन बदलाव स्थायी और असरदार होता है।”
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) की तैयारी करवाने वाले Vipin बताते हैं कि देश में साक्षरता दर बढ़ रही है, नए शैक्षणिक संस्थान खुल रहे हैं और सरकार शिक्षा क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। ऐसे में शिक्षकों की मांग भी तेज़ी से बढ़ रही है।
दोनों का मानना है कि टीचिंग एक स्थिर और सम्मानजनक करियर है।
“प्राइवेट स्कूलों में नौकरी थोड़ी अस्थिर हो सकती है, लेकिन सरकारी शिक्षक की नौकरी अच्छी सैलरी, प्रमोशन और बेहतर वर्क-लाइफ़ बैलेंस देती है। छह घंटे के काम के लिए सैलरी की शुरुआत लगभग 50 हजार रुपये से होती है।”
क्या शिक्षक बनने का यह सही समय है?
शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाली Rajni कहती हैं:
“देश में शिक्षकों के लाखों पद खाली हैं। शिक्षा में सरकारी निवेश बढ़ा है, नई शिक्षा नीति लागू हुई है और स्कूलों व एड-टेक प्लेटफॉर्म्स पर योग्य शिक्षकों की मांग तेज़ी से बढ़ी है। ऐसे में शिक्षक बनने के लिए यह समय बहुत उपयुक्त है।”
शिक्षक कितने प्रकार के होते हैं?
पढ़ाने के स्तर के अनुसार शिक्षक तीन तरह के होते हैं:
- प्राइमरी टीचर (PRT): कक्षा 1 से 5 तक
- ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT): कक्षा 6 से 8 तक
- पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT): कक्षा 11 और 12
आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं:
- PRT:
12वीं पास + डीएलएड / जेबीटी
या 12वीं के बाद 4 साल का बीएलएड - TGT:
ग्रेजुएशन + बीएड - PGT:
संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन + बीएड
इन सभी पदों के लिए CTET या राज्य स्तरीय TET पास करना अनिवार्य होता है।
निजी स्कूलों में शिक्षक भर्ती
बड़े और नामी निजी स्कूलों में भी लगभग वही नियम लागू होते हैं:
- CTET / TET पास होना
- संबंधित विषय में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन
- बीएड / बीएलएड जैसी डिग्री
अधिकतर निजी स्कूल अपनी वेबसाइट या जॉब पोर्टल्स पर वैकेंसी की जानकारी देते हैं।
कौन-कौन सी परीक्षाएं ज़रूरी होती हैं?
TET परीक्षा नौकरी नहीं देती, लेकिन इसे पास किए बिना सरकारी शिक्षक नहीं बना जा सकता।
सबसे अहम परीक्षा है CTET (सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट), जिसे CBSE आयोजित करता है।
इसका पास प्रतिशत केवल 14–15% होता है, इसलिए यह काफ़ी कठिन मानी जाती है।
CTET पास करने के बाद उम्मीदवार:
- केंद्रीय विद्यालय
- नवोदय विद्यालय
- केंद्र शासित प्रदेशों के स्कूलों
में शिक्षक बनने के योग्य हो जाते हैं।
इसी तरह हर राज्य अपनी अलग TET परीक्षा करवाता है, जैसे—
UPTET, HTET, REET, MAHA TET, TNTET, WBTET, KARTET, आदि।
शिक्षक बनने के लिए ज़रूरी कोर्स
12वीं के बाद टीचिंग के लिए कई विकल्प मौजूद हैं:
- बीएड:
ग्रेजुएशन के बाद 2 साल का कोर्स
(कुछ कॉलेजों में 4 साल का इंटीग्रेटेड बीएड भी) - ITEP (इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम):
नई शिक्षा नीति के तहत शुरू किया गया 4 साल का कोर्स
जिसमें ग्रेजुएशन और बीएड एक साथ होता है - बीएलएड:
4 साल का अंडरग्रेजुएट कोर्स (प्राइमरी टीचिंग के लिए) - डीएलएड / डीएड:
2 साल का डिप्लोमा (कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने के लिए) - NTT:
नर्सरी और प्री-स्कूल शिक्षकों के लिए विशेष ट्रेनिंग
परीक्षा की तैयारी कैसे करें?
CTET / TET में दो पेपर होते हैं
- पेपर 1: कक्षा 1–5
- पेपर 2: कक्षा 6–8
एक ज़रूरी बात
बीएड, बीएलएड, डीएलएड जैसे सभी टीचर ट्रेनिंग कोर्स NCTE (नेशनल काउंसिल फ़ॉर टीचर एजुकेशन) से मान्यता प्राप्त होने चाहिए।
किसी भी प्राइवेट संस्थान से कोर्स करने से पहले NCTE अप्रूवल ज़रूर जांच लें।
