Fashion Designer Kaise Banein? Salary, Scope & Career Guide
Fashion Designer Kaise Banein? Salary, Scope & Career Guide
गौरव गोविंद भी लाखों दूसरे बच्चों की तरह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करना चाहते थे।
उनकी पहली पसंद क्रिकेट थी, लेकिन ज़िंदगी ने बल्ले की जगह उनके हाथ में स्केच पेंसिल थमा दी।
रैम्प पर चलते मॉडल, चमचमाती लाइट्स और खूबसूरत डिज़ाइनों पर गूंजती तालियां—यहीं से गौरव की मुलाकात फैशन की दुनिया से हुई। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से पढ़ाई की। नामी डिज़ाइनरों के साथ काम किया, अपना स्टार्टअप शुरू किया और आज वे NIFT वाराणसी कैंपस में पढ़ा रहे हैं।
उनकी कहानी यह साबित करती है कि फैशन डिजाइनिंग एक मजबूत और मुकम्मल करियर विकल्प हो सकता है।
लेकिन इस करियर तक पहुंचने का रास्ता क्या है और इस फील्ड में भविष्य कैसा होता है—करियर कनेक्ट सीरीज़ की इस कड़ी में आज हम यही समझने की कोशिश करेंगे।
देश के लिए कितनी ज़रूरी है यह इंडस्ट्री?
आज भारत में गौरव गोविंद जैसे हज़ारों लोग फैशन इंडस्ट्री को अपना करियर बना रहे हैं।
भारत की टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री लगभग 4.5 करोड़ लोगों को रोज़गार देती है। कृषि के बाद यह देश की दूसरी सबसे बड़ी रोज़गार देने वाली इंडस्ट्री मानी जाती है। खास बात यह है कि इसमें महिलाओं और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों की भी बड़ी भागीदारी है।
भारत की GDP में 2.3% और कुल निर्यात में 12% हिस्सेदारी इसी इंडस्ट्री की है। भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा टेक्सटाइल मार्केट है और सरकार ने अगले पांच वर्षों में इसे 15–20% की रफ्तार से बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
सरकारी नीतियां, बढ़ती घरेलू खपत, ई-कॉमर्स का विस्तार और वैश्विक मांग—इन सभी कारणों से फैशन बिज़नेस को नया आकार मिला है। इसी वजह से अब इंडस्ट्री को ऐसे प्रोफेशनल्स चाहिए जो सिर्फ डिजाइन ही नहीं, बल्कि मैनेजमेंट, ब्रांडिंग, डेटा और स्ट्रैटेजी की भी समझ रखते हों।
फैशन डिजाइनर कौन होता है?
YWCA में फैशन डिजाइनिंग पढ़ा चुकीं सुनैना द्वारि दास बताती हैं,
“फैशन डिजाइनर वे प्रोफेशनल होते हैं जो अपनी क्रिएटिव सोच, रिसर्च और कल्पना के ज़रिए कपड़े, एक्सेसरीज़ और फैशन प्रोडक्ट डिजाइन करते हैं। वे सिर्फ सुंदर कपड़े नहीं बनाते, बल्कि हर डिजाइन के ज़रिए एक कहानी, पहचान और सोच पेश करते हैं।”
उनके मुताबिक, फैशन डिजाइनर का काम सिर्फ यह तय करना नहीं होता कि कपड़ा कैसा दिखेगा, बल्कि उससे पहले वे बदलते फैशन ट्रेंड, लोगों की पसंद और बाज़ार की मांग को समझते हैं। इसके बाद फैब्रिक, रंग और टेक्सचर पर रिसर्च कर अपने आइडिया को स्केच और डिजाइन में ढालते हैं।
आज के दौर में फैशन डिजाइनर का रोल सिर्फ क्रिएटिव नहीं, बल्कि स्ट्रैटेजिक भी हो गया है। उन्हें ट्रेंड एनालिसिस, ब्रांड आइडेंटिटी, कस्टमर बिहेवियर और प्रोडक्शन-मार्केटिंग की समझ भी होनी चाहिए।
गौरव गोविंद कहते हैं,
“फैशन डिजाइनर कपड़ों के ज़रिए लोगों की पहचान गढ़ते हैं और फैशन को कला से बिज़नेस तक जोड़ते हैं।”
क्या फैशन डिजाइनिंग सिर्फ सिलाई तक सीमित है?
सुनैना के अनुसार, फैशन डिजाइनिंग हर उस छात्र के लिए है जो क्रिएटिव हो और जिसे अपैरल, टेक्सटाइल और एक्सेसरीज़ डिजाइन करने का जुनून हो।
कॉमर्स, आर्ट्स या साइंस—किसी भी बैकग्राउंड का छात्र फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई कर सकता है। बस 12वीं पास होना ज़रूरी है।
- आर्ट्स के छात्र अपनी स्टोरीटेलिंग और सांस्कृतिक समझ से आगे बढ़ सकते हैं
- साइंस बैकग्राउंड वाले छात्र टेक्नोलॉजी, एनालिटिक्स और सप्लाई चेन में अच्छा कर सकते हैं
- कॉमर्स के छात्र ब्रांडिंग, रिटेल और फैशन बिज़नेस में अपनी जगह बना सकते हैं
JD इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की प्रवक्ता सृष्टि जायसवाल के मुताबिक, फैशन डिजाइनिंग सबके लिए खुली है, लेकिन इसके लिए कुछ हुनर ज़रूरी हैं:
- क्रिएटिविटी और नए आइडिया
- अच्छी ऑब्ज़र्वेशन स्किल और विज़ुअल सेंस
- धैर्य और बारीक़ियों पर ध्यान
- नए ट्रेंड और संस्कृतियों के बारे में जानने की जिज्ञासा
- हर दिन कुछ नया सीखने की चाह
फैशन डिजाइनिंग का मतलब सिर्फ सिलाई नहीं है। इसमें यह समझना भी शामिल है कि रेशे से कपड़ा कैसे बनता है और कपड़ा बाज़ार तक कैसे पहुंचता है।
मार्केट विज़िट, ट्रेंड रिसर्च, घंटों की स्केचिंग, ट्रायल-एंड-एरर और कड़ी मेहनत—यह सब इस प्रोफेशन का हिस्सा है।
करियर के विकल्प और सैलरी
आज फैशन डिजाइनर सिर्फ बुटीक तक सीमित नहीं हैं। उनके लिए रिटेल, मीडिया, मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और उद्यमिता में भी मौके हैं।
आगे चलकर आप:
- फैशन डिजाइनर
- फैशन स्टाइलिस्ट
- अपैरल या टेक्सटाइल डिजाइनर
- फैशन बायर या मर्चेंडाइज़र
- इलस्ट्रेटर
- कॉस्ट्यूम डिजाइनर
- फैशन कंटेंट क्रिएटर या कंसल्टेंट
बन सकते हैं।
शुरुआती स्तर पर सैलरी 3 से 6 लाख रुपये सालाना हो सकती है। सीनियर डिजाइनर, ब्रांड ओनर और कंसल्टेंट इससे कहीं ज़्यादा कमाते हैं।
गौरव गोविंद के अनुसार, शुरुआत में 30 हज़ार से 1 लाख रुपये प्रति माह तक की कमाई संभव है।
इस फील्ड के लिए क्या पढ़ाई करनी होती है?
12वीं के बाद आप:
- बैचलर ऑफ डिजाइन (B.Des) इन फैशन डिजाइन
- बैचलर ऑफ साइंस (B.Sc) इन फैशन डिजाइन
- डिप्लोमा इन फैशन डिजाइन
कर सकते हैं।
इसके अलावा फैशन स्टाइलिंग, पैटर्न मेकिंग और बुटीक मैनेजमेंट जैसे शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स (3–6 महीने) भी होते हैं।
पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए मास्टर्स ऑफ डिजाइन (M.Des) या पीजी डिप्लोमा किया जा सकता है।
कोर्स सिलेबस में शामिल होते हैं:
- फैशन इलस्ट्रेशन और स्केचिंग
- पैटर्न मेकिंग और गारमेंट कंस्ट्रक्शन
- टेक्सटाइल साइंस और फैब्रिक नॉलेज
- कंप्यूटर एडेड डिजाइन (CAD)
- फैशन मार्केटिंग, मर्चेंडाइजिंग और पोर्टफोलियो डेवलपमेंट
फैशन डिजाइनिंग के टॉप इंस्टीट्यूट
- NIFT (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी) – देशभर में 20 कैंपस
- NID (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन) – अहमदाबाद, गांधीनगर, बेंगलुरु
- SVPITM, कोयंबटूर – टेक्सटाइल और फैशन मैनेजमेंट कोर्स
- IIAD (इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइन) – फैशन बिज़नेस मैनेजमेंट
इसके अलावा कई निजी संस्थान भी B.Des, BBA, M.Des, MBA और शॉर्ट-टर्म प्रोफेशनल कोर्स कराते हैं। दिल्ली, मुंबई, जयपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों में इनके कैंपस हैं, जहां प्रति सेमेस्टर फीस 3 से 3.6 लाख रुपये तक होती है।
